11 नवंबर 2011

Safal vah jo

   सफल वह जो
ढल गया
परिवेश के साथ
बहता हो
मौसमी हवाओं के साथ
लहरों  की गति के साथ
 बढती भीड़ के साथ
वह
वह है
जो भीड़ है
भीड़ का एक
 पुर्जा है
वह जो भेड़ है
भीड़ और भेड़
भला क्या अंतर दोनों में
चाल एक है दोनों की

सफल वह जो
हो जाता देखकर
 आदमी को उसका
अंतरात्मा से उसे क्या ?
उसे तो होना है सफल

सफल वह है
जो बातूनी  है
जो चिपका लेता हो हंसी होटों पर
उसे देखकर
जो उसका मसीहा है

पर मैं हूँ कि
भीड़ का आदमी
नहीं हो सकता

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